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Metro में महिलाओं के मुफ्त सफर पर दिल्‍ली हाई कोर्ट ने कही बड़ी बात, जान कर होगी खुशी

मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त सफर के दिल्ली सरकार के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका को हाई कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायमूर्ति डीएन पटेल व न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने कहा कि याचिका का कोई आधार नहीं है। यह सरकार का अधिकार है कि वह किस वर्ग को किराये में छूट दे। अदालत ने बिना किसी ठोस मुद्दे के याचिका दायर करने पर याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और चार सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने के निर्देश दिए।

कम किराए की मांग भी हुई खारिज

पीठ ने याचिकाकर्ता की उस अपील को भी खारिज कर दिया, जिसमें उसने किराये को कम करने की मांग की थी। मुख्य पीठ ने कहा कि किराया तय करना भी वैधानिक प्रावधान है और यह लागत समेत कई कारकों पर निर्भर करता है। इसका निर्धारण जनहित याचिका दाखिल कर नहीं किया जा सकता है।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता बिपिन बिहारी सिंह ने किराया तय किए जाने में कोई अनियमितता की बात नहीं कही है। इस तरह से याचिका में कोई दम नहीं है। पीठ ने कहा कि अदालत किराया तय करने को लेकर केंद्र या दिल्ली सरकार व दिल्ली मेट्रो को कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं करने जा रही है। दिल्ली सरकार के अधिवक्ता संजय घोष ने कोर्ट से कहा था कि महिलाओं को मुफ्त में यात्रा कराने का मुद्दा अभी विचाराधीन है।

किराये में छूट को लेकर कोई निर्णय नहीं किया गया है। इसलिए याचिका निरस्त की जाए। याचिकाकर्ता ने मेट्रो किराया कम करने एवं टिकट के मौजूदा छह स्लैब को 15 स्लैब में करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को मेट्रो में मुफ्त सफर कराने से भेदभाव होगा। पहले कभी भी किराये में इतनी वृद्धि नहीं की गई थी।

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