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दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में विभाजन बढ़ा रहे हैं पीएम मोदी: द इकनॉमिस्ट

मैगजीन ने CAA के बाद लिखे अपने रिव्यू में कहा है कि सरकार की नीतियों से भले ही नरेंद्र मोदी चुनाव जीत जाएं लेकिन देश यह देश के लिए 'राजनीतिक जहर' साबित होंगी। मैगजीन ने चेताया है कि CAA लागू होने से देश में खूनी संघर्ष हो सकता है।

हाइलाइट्स

  • ‘द इकनॉमिस्ट’ ने नरेंद्र मोदी सरकार पर लेख के जरिए किया हमला
  • मैगजीन ने CAA को भारत के लिए सही नहीं बताया है
  • मशहूर मैगजीन ने कहा कि इससे भारत के पंथनिरपेक्ष मूल्य कमजोर हुए हैं
  • मैगजीन ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर भी सवाल खड़े किए हैं

    नई दिल्ली
    दुनिया की मशहूर मैगजीन ‘द इकनॉमिस्ट’ ने नागरिकता संशोधन ऐक्ट (CAA) को एनडीए सरकार का अति महत्वाकांक्षी कदम बताया है। मैगजीन ने अपने ताजा अंक में ‘असहिष्णु भारत’ (इन्टॉलरेंट इंडिया) नाम से फ्रंट कवर छापा है। मैगजीन ने अपने लेख में मोदी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कई हमले किए हैं। इसमें कहा गया है कि ऐसा लग रहा है कि पीएम मोदी भारत को एक सहिष्णु और बहु धार्मिक देश की जगह उग्र हिंदुत्व राज्य की तरफ ले जा रहे हैं।
    मैगजीन ने CAA के बाद लिखे अपने रिव्यू में कहा है कि सरकार की नीतियों से भले ही नरेंद्र मोदी चुनाव जीत जाएं लेकिन देश यह देश के लिए ‘राजनीतिक जहर’ साबित होंगी। मैगजीन ने चेताया है कि CAA लागू होने से देश में खूनी संघर्ष हो सकता है।

    आर्टिकल कहता है, ‘संविधान के पंथनिरपेक्ष मूल्यों को कमजोर करने वाला पीएम मोदी का ताजा कदम भारतीय लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है और इसका असर दशकों तक रह सकता है।’ लेख में आगे लिखा गया है कि धर्म और राष्ट्रीय पहचान पर विभेद कर बीजेपी को अपना समर्थन बढ़ाने में सफलता मिली है और वह कमजोर अर्थव्यवस्था से ध्यान भटकाने में भी सफल रही है।

    लेख में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। मैगजीन लिखता है कि NPR से भगवा दल अपने बांटने वाले एजेंडे को मदद मिलेगी।

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