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SC-ST एक्ट के खिलाफ सवर्णों का ‘भारत बंद’, वाराणसी में पीएम मोदी का पुतला फूंका

SC-ST एक्ट में संशोधन के खिलाफ सवर्णों के करीब 35 संगठनों ने आज भारत बंद का एलान किया है. सर्वणों के इस बंद का असर दिखना शुरू हो गया है. भारत बंद के मद्देनदर सुरक्षा व्यवस्था के जबरदस्त इंतजाम किए गए हैं. सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में मध्य प्रदेश है. वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं. मध्यप्रदेश के सभी जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है, इसके साथ ही 18 जिलों में धारा 144 लागू लगाई गई है. पड़ोसी राज्य राजस्थान में भी बंद को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया गया है.

LIVE UPDATES:

10.11 AM: प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी एससी-एसटी एक्ट के विरोध में बंद का असर दिख रहा है. वाराणसी के बीएचयू में प्रदर्शनकारी छात्रों ने हैदराबाद गेट पर प्रधानमंत्री मोदी का पुतला फूंका. छात्रों की मांग है कि एसटीएसटी एक्ट में हुए संशोधन को वापस लिया जाए.

09.58 AM: राजस्थान के कई जिलों में सवर्णों के बंद का व्यापक असर देखने को मिल रहा है. प्रतापगढ़, अलवर, दौसा, अजमेर, भरतपुर, बारां और नागौर जिले में बंद का असर देखने को मिल रहा है. कई जगहों पर बंद को पेट्रोल पंप एसोशिएशन और मेडिकल स्टोर सोसाइटी का भी समर्थन मिला है. स्कूल और कॉलेजों में भी छुट्टी कर दी गई है.

09.51 AM: पूरे मध्यप्रदेश में भारत बंद के चलते लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. राजधानी भोपाल में लोगों ने अनोखे ढंग से प्रदर्शन किया. यहां पुरुषों ने महिलाओं का स्वांग बनाकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया.

09.47 AM: सवर्ण समाज की ओर बुलाए गए भारत बांद का आज असर राजस्थान के अलवर में भी असर दिख रहा है. इस दौरान विभिन्न संगठनों और व्यपारियो ने भी बंद का समर्थन किया है. इस बन्द में व्यपारियों ने स्वतः ही दुकानें बन्द रखीं. सुरक्षा की दृष्टि से चप्पे चप्पे पर पुलिस भी तैनात है. प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर सरकार सवर्णो के हित मे नहीं है तो पूरी लड़ाई लड़ी जाएगी, लोगों ने कहा कि हम किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं है.

09.44 AM: बिहार के सहरसा में एससीएसटी एक्ट के खिलाफ भारत बंद का का असर देखने को मिल रहा है. सहरसा के बाजारों में भारत बन्द के चलते दुकानों को बंद रखा गया है. जिले के सभी प्रमुख और मार्गों पर आवाजाही बंद है. प्रदर्शन कारियों ने मुख्य चौराहे पर भी यातायात बाधित किया है. बंद के चलते आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है.

09.36 AM: मध्यप्रदेश के इंदौर, उज्जैन, छिंदवाड़ा और नरसिंहपुर में बंद का असर देखा जा रहा है. उज्जैन में बंद का इसर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा है. लोगों को दवाइयां मिलने में परेशानी हो रही है. इंदौर में पेट्रोल पंप और स्कूल कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. छिंदवाड़ा में भी बंद का असर देखा जा रहा है. भोपाल में स्कूल कॉलेज बंद हैं और जगह जगह पुलिस बल तैनात किया गया है.

09.25 AM: उत्तर प्रदेश में भी सवर्णों के भारत बंद का असर दिखने लगा है. यूपी के आगरा में प्रदर्शकारियों ने आगरा-ग्वालियर हाईवे को जाम कर दिया है. लोगों की मांग है कि एससीएसटी एक्ट में संशोधन को वापस लिया जाए. लोगों ने कहा कि एससीएसटी के लिए कानून ला सकते हैं तो राम मंदिर के लिए क्यों नहीं ?

09.22 AM: राजस्थान के बूंदी में भी बंद का असर देखने को मिल रहा है. शहर के बाजार बंद हैं, सवर्णों के बंद को कई संगठनों का समर्थन मिला है. बूंदी में पेट्रोल पंप एसोशिएशन और मेडिकल स्टोर सोसाइटी का समर्थन मिला है. प्रदर्शनकारी मोटरसाइकिल पर निकल कर खुली हुई दुकानों को बंद करवा रहे हैं.

09.22 AM: बिहार के दरभंगा में प्रदर्शनकारियों ने बिहार संपर्क क्रांति ट्रेन को रोका है. प्रदर्शनकारी एससी-एसटी एक्ट को काला कानून बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को लागू करने की मांग कर रहे हैं.

09.19 AM: बिहार के कैमूर में भी भारत बंद का असर देखने को मिल रहा है. कैमूर जिले में लोग मोहनिया भभुआ पथ को रतवार गांव के पास जामकर बीजेपी मुर्दाबाद और एक्ट को वापस लेने के नारे लगा रहे हैं. इस जाम में स्कूली वाहन, दुग्ध वाहन के साथ साथ कई वाहन जहां तहां फंसे हुए हैं. कई विद्यालयों के वाहन को वापस लौटाया जा रहा है. बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, ग्रामीण सड़कों पर ही बैठ कर नारेबाजी कर रहे हैं.

बीजेपी में कानून को लेकर बंटी राय
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने कल कानून पर निजी राय रखते हुए कहा कि जमीन पर एससी-एसटी एक्ट का दुरूपयोग हो रहा है. इससे लोगों के अंदर असमानता का भाव पैदा हो रहा है. अधिकारी भी डर रहे हैं कि अगर मुकदमा दर्ज नहीं हुआ तो कार्यवाही हो जाएगी. फर्जी मुकदमों में लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ”पक्ष और विपक्ष का मुद्दा नहीं है, कानून के दुरुपयोग को रोकने के पक्ष में हूं मैं, सभी दल के नेता अपने यहां के फीडबैक को लें, सभी दल समाधान को लेकर विचार करें.”

क्यों हो रहा है बवाल?
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को एससी/एसटी एक्ट में बड़ा बदलाव करते हुए कहा था कि इसके अंतर्गत नामजद आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की मंजूरी अनिवार्य होगी. इसके अलावा एक पुलिस उपाधीक्षक यह जानने के लिए प्रांरभिक जांच कर सकता है कि मामला इस अधिनियम के अंतर्गत आता है या नहीं.

विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार पर आरोप लगाए थे की सरकार ने कोर्ट में दलील ठीक ढ़ंग से नहीं रखी जिसकी वजह से कानून कमजोर हुआ अब फिर दलितों के खिलाफ अत्याचार बढ़ेंगे. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दो अप्रैल को दलितों ने भारत बंद बुलाया था इस दौरान जमकर हिंसा हुई थी.

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आने वाले बीजेपी सांसदों ने भी विरोध में आवाज उठाई थी और अपनी ही सरकार से कहा था कि सरकार अध्यादेश लाकर कानून को पूर्ववत लागू करे. जिसके बाद मोदी सरकार ने एससी/एसटी एक्ट को पूर्ववत लागू करने के लिए संसोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पास कराया. अब इसके विरोध में सवर्ण वर्ग ने आवाज उठानी शुरू कर दी है.

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